एआइ जनित (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाई गई) तस्वीरों के बढ़ते उपयोग से साइबर अपराधों का खतरा बढ़ रहा है। साइबर विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और निजी तस्वीरें या डेटा अनजान प्लेटफार्म पर अपलोड करने से पहले सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग ने घिबली को लेकर भी सचेत करने को कहा है।
साइबर विभाग के अधिकारियों के अनुसार एआइ आधारित फोटो एडिटिंग और आर्ट जनरेशन एप उपयोगकर्ताओं के चेहरे की विशेषताओं और अन्य व्यक्तिगत जानकारी को संग्रहीत कर सकते हैं। इसके बाद इन डेटा का उपयोग डीपफेक, पहचान की चोरी और साइबर अपराधों के लिए किया जा सकता है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि लोग प्राइवेसी पालिसी पढ़े बिना ही अपनी तस्वीरें एआइ प्लेटफार्म पर अपलोड कर रहे हैं।
इन शर्तों में कई बार लिखा होता है कि प्लेटफार्म को आपकी तस्वीरों का व्यावसायिक उपयोग और पुनर्वितरण करने का अधिकार मिलता है, इससे आपकी निजता खतरे में पड़ सकती है।
लोगों को निजी तस्वीरें या डेटा अनजान प्लेटफार्म पर अपलोड करने से पहले सतर्क रहने की सलाह दी
6 प्रदेश की जनता से आग्रह है कि वह डिजिटल सतर्कता बनाए रखें और अपनी निजी जानकारी को सुरक्षित रखें ताकि साइबर अपराधों से बचा जा सके।
मोहित चावला, डीआइजी साइवर अपराध हिमाचल प्रदेश।
किसी भी एआइआधारित फोटो एडिटिंग एप या वेबसाइट का उपयोग करने से पहले उसकी प्राइवेसी पालिसी अवश्य पढ़ें। अनजान या असत्यापित एप पर संवेदनशील तस्वीरें और डेटा साझा न करें। यदि किसी एआइ प्लेटफार्म पर तस्वीर अपलोड की है तो बाद में उसे डिलीट करने के विकल्प की जांच करें।