सतिंदर सरताज की सादगी के फैन हुए पांवटा के लोग

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पांवटा साहिब में आयोजित होली मेले की तीसरी व आखिरी सांस्कृतिक संध्या में पंजाबी संगीत जगत के मशहूर गायक सतिंदर सरताज ने अपनी शानदार प्रस्तुति से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। नगर परिषद मैदान में आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में सरताज ने अपने प्रसिद्ध गानों से पंडाल में उपस्थित हजारों दर्शकों का दिल जीत लिया। इस दौरान

सतिंदर सरताज की सादगी को देखकर पंडाल में मौजूद 20 हजार से अधिक लोग कायल हो गए। सरताज के कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी बुधवार तक लोगों की चर्चा में सरताज रहा व जगह-जगह सरताज की सादगी व गायकी की बातें होती रही ।

कार्यक्रम के दौरान पंडाल पूरी तरह से भर गया था और इमारतों पर भी लोग चढ़ गए थे। कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी दर्शकों का मन नहीं भरा और वह सरताज का

अभिनंदन करते हुए पंडाल से बाहर नहीं जाना चाहते थे। इस आयोजन में सरताज ने गाड़ी पर खड़े होकर लोगों का आभार व्यक्त किया जो दर्शाता है कि वह न केवल एक महान गायक हैं, बल्कि दर्शकों के दिलों में भी विशेष स्थान रखते हैं।

अमूमन कलाकार कार्यक्रम खत्म होने के बाद गाड़ी में बैठकर चुपचाप निकल जाते हैं और दर्शक आधे से ज्यादा पंडाल को छोड़कर चले जाते हैं, लेकिन सतिंदर सरताज का कार्यक्रम अलग था। उनके संगीत और उनकी सादगी ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया और दर्शकों के दिलों में छाप छोड़ गए।

कार्यक्रम के दौरान एसडीएम पांवटा गुंजित चीमा, डीएसपी पांवटा मानवेंद्र ठाकुर, तहसीलदार ऋषभ शर्मा ने सरताज को सम्मानित किया।

जाने लोगो ने क्या कहा सरताज़ के बारे में
सादगी सरताज़ की सुरों के सरताज, सतिंदर सरताज

हमने कई अंतरराष्ट्रीय व राज्य स्तरीय कार्यक्रम देखें है तथा एक से बढ़कर एक कलाकार भी देखें है। अधिकतर कलाकार जब मंच पर चढ़ते है तो वह लम्बे लम्बे बाउंसर से घिरे होते है। कल मैंने देखा कि देश विदेश में मशहूर गायक सतिंदर सरताज जी जब मंच पर आए तो वह बहुत ही सादगी में आए। उनके इर्द-गिर्द एक भी बाउंसर नहीं था। खाली हिमाचल प्रदेश पुलिस के जवान ही थे। उनको देखने के लिए लोग चार बजें से ही पंडाल में पहुंच गए। अधिक भीड़ होने के कारण प्रशासन को मुख्य गेट 7 बजें ही बंद करना पड़ा। सतिंदर सरताज जी को मुख्य गेट से मंच तक लाने के लिए प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। जब किसी कलाकार का कार्यक्रम खत्म होता है तो वह भागकर गाड़ी में चढ़कर चुपके से निकल जाता है और आधे से ज्यादा दर्शक भी पंडाल को पहले ही छोड़कर चले जाते है। लेकिन कल हुए कार्यक्रम में पंडाल पूरा भरा हुआ था तथा इमारतों पर भी लोग चढ़े हुए थे व कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी दर्शकों का पंडाल से जाने का मन नहीं कर रहा था, जब सतिंदर सरताज जी मंच से उतरे तो वह गाड़ी के ऊपर खड़े होकर लोगों का अभिनंदन करते हुए नजर आए। इस लिए इन्हें सुरों के सरताज कहा गया है 😊❤️❤️