जिस प्रकार राजनीति में देखने को मिलता है कि कोई भी सरकारें हमेशा सत्तासीन नहीं रही हैं,परन्तु अगर कोई जनता के दिलों में जगह बनाने में कामयाब होते हैं तो वह है उन ख़ास माननीय विधायक के जनता के प्रति जनहित के फैसले एवं अनेकों कार्य जिन जनहित के कार्यों के बदोलत ऐसे अनेकों जनप्रतिनिधि समाज में हमेशा लोकप्रियता हासिल करने में सफल होते आएं हैं और जनता का हमेशा मान सम्मान और विश्वास पाते हैं जिन महत्वपूर्ण कार्यों के आधार पर ही एक जनप्रतिनिधि अनेकों बार विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव क्षेत्र से भारी मतों से जीत कर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते है, इसी परिप्रेक्ष्य में आज राजनीति के एक ऐसे चिंतनीय और गंभीर विषय को लेकर आप सभी तक चर्चा एवं विश्लेषण करने का प्रयास करेंगे जो चिंतनीय विषय हमें देखने एवं सुनने को मिलता है, जैसा कि हिमाचल प्रदेश के विधानसभा और अन्य विभिन्न क्षेत्रों में देखने एवं सुनने को मिलता है कि जिस प्रकार एक दल के विधायक दूसरे दल की सरकार और विधायकों,मंत्री और मुख्यमंत्री पर आरोप लगाएं जातें हैं तो वहीं सत्ताधारी सरकार और विधायकों द्वारा पलटकर आरोप फिर विपक्ष पर भी लगाएं जातें हैं, तो वहीं जनता की जानकारी अनुसार जिस आरोप प्रत्यारोप की संस्कृति से देव भूमि हिमाचल प्रदेश की जनता कहीं ना कहीं आहात और चिन्तित भी नज़र आती है, क्योंकि संविधान के अनुसार जिस उद्देश्य और लक्ष्य के साथ जनता जनप्रतिनिधियों को विधानसभा पहुंचाने का प्रयास करतीं हैं कि वह हमारे क्षेत्र की समस्या विधानसभा और सरकार प्रशासन के माध्यम से हल करवाने का प्रयास करेंगे, क्योंकि अब जनता भी शिक्षित और अधिक जागरूक हो चुकी, परन्तु जिस प्रकार समय-समय पर अनेकों बार मुद्दों रहित और व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप देखने को मिलते हैं वह परंपरा कहीं ना कहीं निराशाजनक है,जिस आरोप प्रत्यारोप के गंभीर और चिंतनीय विषय पर भरमौर विधानसभा के विधायक डॉ जनक राज ने हाल ही के बजट सत्र के दौरान सदन में बात रखी जहां उन्होंने स्पष्ट शब्दों में बात रखने का प्रयास किया कि हम सभी विधायकों को जनता ने विधानसभा में आरोप प्रत्यारोप लगाने के लिए नहीं बल्कि अपने विधानसभा और प्रदेश को विकास की दृष्टि से केसे आगे बढ़ाया जाए और मिलकर और राजनीति से ऊपर उठकर जनता की हर समस्या का हल करने के लिए जीतकर विधानसभा भेजा है,जिस गंभीर विषय पर चर्चा एवं विश्लेषण करने की जरूरत है, क्योंकि जनता ने इन सभी आरोप प्रत्यारोप के लिए शायद किसी भी माननीय विधायक को चुनकर नहीं भेजा है,इस प्रकार कहीं ना कहीं हिमाचल प्रदेश के विधानसभा और राजनीति की गरिमा को बनाए रखने की भी कहीं न कहीं परम आवश्यकता है,इस प्रकार हिमाचल प्रदेश में अनेकों ऐसे माननीय विधायक रहे हैं और वर्तमान में भी मौजूद हैं जो आरोप प्रत्यारोप के बजाय विकास की दृष्टि से अपने क्षेत्र को कैसे विकसित किया जाएं हमेशा जनता के बीच और समस्याओं का निदान करने के लिए सरकार और प्रशासन के माध्यम से हल करवाने का प्रयास करते नज़र आते हैं, परन्तु हिमाचल प्रदेश में ऐसे भी अनेकों माननीय विधायक देखने को मिलते हैं जो पांच वर्ष तक मिडिया एवं सोशल मीडिया में आरोप प्रत्यारोप लगाने में ही अपने कार्यकाल को पूरा कर जाते हैं जिसका खामियाजा उस क्षेत्र की जनता को विभिन्न समस्याओं एवं विकास के अभाव में भुगतना पड़ता है,इस प्रकार माननीय विधायक गणों से निवेदन और सुझाव रहेगा कि इस परंपरा पर कहीं ना कहीं रोक लगाने की अनुशंसा करें ताकि जनता में आपके विकास कार्यों के माध्यम से आपकी लोकप्रियता हमेशा बनी रहे,ऐसी उम्मीद और कामना करते हैं।
*स्वतन्त्र लेखक-हेमराज राणा सिरमौर*